September 11, 2026
हंसी के फुहार से महकी काव्य गोष्ठी, कवियों ने बांधा समां राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरों  के तत्वावधान में हुआ काव्य आयोजन, कई प्रदेशों से जुटे कवि

हंसी के फुहार से महकी काव्य गोष्ठी, कवियों ने बांधा समां राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरों  के तत्वावधान में हुआ काव्य आयोजन, कई प्रदेशों से जुटे कवि

 

प्रमोद कुमार तिवारी

जिला संवाददाता

मऊ- गुरुवार को आयोजित राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीव ब्यूरो की काव्य गोष्ठी में देश के अलग-अलग प्रदेशों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से ऐसा रंग जमाया कि देर तक तालियों की गड़गड़ाहट और ठहाकों से पूरा माहौल गूंजता रहा। कहीं हास्य की फुहार छूटी तो कहीं शायरी ने दिल को छुआ और वीर रस की कविताओं ने श्रोताओं के भीतर जोश भर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर विधिवत कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। दूर-दराज से पहुंचे कवियों का संस्था की ओर से अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। काव्य गोष्ठी में नागेश शांडिल्य जी ने अपनी हास्य रचनाओं से ऐसा समां बांधा कि श्रोता हंसी से लोटपोट हो गए। उनकी प्रस्तुति और चुटीले अंदाज ने पूरे कार्यक्रम में जान डाल दी। खासकर उनकी हास्य कविताओं पर सभागार में लगातार ठहाके गूंजते रहे। वहीं प्रतापगढ़ की कवयित्री प्रीति पांडेय ने अपनी कविताओं और शायरी से श्रोताओं का मन मोह लिया। उनकी रचनाओं में भावनाओं की मिठास के साथ शब्दों का सुंदर तालमेल देखने को मिला। रेणुकूट से पहुंचे मनमोहन मिश्रा ने अपनी उच्चस्तरीय हिंदी और प्रभावशाली शब्द चयन से श्रोताओं को साहित्य की गंभीरता का अहसास कराया। उनकी रचनाओं को भी खूब सराहना मिली। वहीं पंकज प्रखर जी ने अपने ओजपूर्ण अंदाज और वीर रस की रचनाओं से माहौल में जोश भर दिया। उनकी प्रस्तुति पर भी श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम का संचालन भी बेहद रोचक अंदाज में हुआ। हास्य के रंग में रंगे संचालन ने कवियों की प्रस्तुतियों के बीच ऐसा तारतम्य बनाए रखा कि श्रोता अंत तक कार्यक्रम से जुड़े रहे।

मंच से कविता की पंक्तियां गूंजती रहीं और सामने बैठे श्रोता कभी मुस्कुराते, कभी ठहाके लगाते तो कभी तालियों से कवियों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। कार्यक्रम के समापन अवसर पर संस्था के निदेशक ने अपने संबोधन में आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज में सकारात्मक माहौल बनाने के साथ-साथ हिंदी और साहित्य के प्रति लोगों का जुड़ाव भी मजबूत करते हैं। उन्होंने काव्य गोष्ठी की रूपरेखा तैयार करने और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रशासनिक अधिकारी रजनीश मीणा की भी प्रशंसा की। निदेशक ने भविष्य में भी इसी तरह के साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों को लगातार जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। इस दौरान बीज अनुसंधान के वरिष्ठि प्रशासनिक अधिकारी चंद्रमौली शर्मा, वैज्ञानिक डॉ विनेश विनोथ एवं संस्थान के वैज्ञानिक व कर्मचारी मौजूद रहे

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सत्य प्रकाश दूबे
सत्य प्रकाश दूबे
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