September 23, 2026
बदलती जलवायु में खेती की नई उम्मीद: बीजों को बनाया जा रहा लचीला

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मऊ में विशेषज्ञों का हो रहा है बीजों पर महामंथन

रिपोर्ट:✒️प्रमोद कुमार तिवारी

मऊ- खेत में लहलहाती फसल की कहानी भले ही कटाई के समय दिखाई देती हो, लेकिन उसकी पहली उम्मीद एक छोटे से बीज में जन्म लेती है। बदलते मौसम, बढ़ते सूखे और अनिश्चित बारिश के दौर में यही बीज अब खेती को टिकाऊ और मजबूत बनाने की सबसे अहम कड़ी बनता जा रहा है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखकर भा.कृ.अनु.प.–राष्ट्रीय बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, मऊ में “उत्तर प्रदेश में सतत कृषि के लिए जलवायु-लचीली बीज प्रणालियाँ” विषय पर दस दिवसीय ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद, लखनऊ के प्रायोजन में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 से 30 सितंबर तक चलेगा। 22 सितंबर को आयोजित उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. परमेंद्र सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. ए. आनंदन ने की। उद्घाटन अवसर पर डॉ. परमेंद्र सिंह ने कहा कि बीज केवल खेती की शुरुआत नहीं, बल्कि कृषि व्यवस्था की पूरी नींव है।

बदलती जलवायु के बीच ऐसी किस्मों का विकास जरूरी है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी किसानों का साथ दे सकें। उन्होंने विशेष रूप से सूखा-प्रवण बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए तनाव-सहिष्णु एवं रोग-प्रतिरोधी किस्मों के विकास तथा दलहनी फसलों पर शोध को और गति देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जैव-सुदृढ़ीकृत किस्मों के विकास पर भी जोर दिया। संस्थान के निदेशक डॉ. ए. आनंदन ने अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) ऑन सीड क्रॉप्स की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बीज प्रतिस्थापन दर बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु की चुनौतियों के बीच ऐसी बीज प्रणालियों का विकास समय की मांग है, जो किसानों को प्रतिकूल मौसम में भी स्थिर उत्पादन का भरोसा दे सकें। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे शोध और तकनीक को खेतों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ते हुए ऐसी जलवायु-लचीली बीज प्रणालियों के विकास की दिशा में काम करें, जो आने वाले समय में किसानों की उम्मीद को मजबूती दे सकें, कार्यक्रम में बीज विज्ञान संस्थान के डॉ. अंजनी सिंह, प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. कल्याणराव, वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. पवित्रा वी. तथा डॉ. कल्याणी कुमारी सहित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए वैज्ञानिकों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता की।

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प्रमोद कुमार तिवारी
प्रमोद कुमार तिवारी

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